विशेष विदेशी मुद्रा जुटाव योजनाओं के तहत प्रवासी भारतीयों की जमा राशि बढ़ने से देश की विदेशी मुद्रा उपलब्धता को सहारा मिला है। रिपोर्टों के अनुसार इस प्रवाह से भारतीय रिजर्व बैंक की क्षमता मजबूत हुई और बैंकिंग प्रणाली में तरलता बेहतर रहने की उम्मीद बनी। हालांकि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमत और अंतरराष्ट्रीय तनाव रुपये पर दबाव डाल सकते हैं। अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा प्रवाह सकारात्मक संकेत है, लेकिन विनिमय दर बाजार वैश्विक परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। स्रोत: Reuters, 3 सितंबर 2026।


